एक कदम धरती के लिए

save nature
Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on email
Share on print
बाढ़ आने का दो कारण हैं।  वह हैं प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारण।  प्राकृतिक कारण जैसे ज्यादा बारिश होना, हिमनद(ग्लेशियर) का पिघलना, नदियों में तूफान आना, इन सबके द्वारा बाढ़ आ सकता हैं। 
हमारी प्रकृति में आज अनेक भेदभाव किया जथा हैं।  इसका मुख्य कारण थो इंसान हैं।  मनुष्य अपने सुख के लिए प्रकृति को नुकसान पहुंचते हैं।  लेकिन प्रकृति भी कितना सह सकता हैं।  उसे भी गुस्सा आता होगा।  शायद इसलिए ही, वे उनके प्रकृतिं समस्याओं का हमारे ऊपर भेजते हैं।  शास्त्र के अनुसार इस प्रकृति दूरथा का कारण शायद बहुत अलग होगा।  लेकिन उस व्यक्ति के लिए जो प्रकृति को अपना माँ समझकर प्रणाम करता है, उस के लिए यह कोई विपत्ति नहीं बल्कि यह प्रकृति माँ का दुःख और गुस्सा हैं।  एक प्रकृति विपदा हैं जिससे प्रकृति का गुस्सा का सबसे बुरा दृश्य मनुष्य को मिला हैं।  वह हैं बाढ़। पशु पक्षी , पेड़ पौदे, इंसान  सभी को एक सम्मान बुरा असर पड़ता हैं।  कितने जीवन  नष्ट हुआ हैं।  कितने मासूमों की हँसी मिट गयी हैं।  बाढ़ का आने का कारण क्या हो सकता हैं ? बाढ़ आने का दो कारण हैं।  वह हैं प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारण।  प्राकृतिक कारण जैसे ज्यादा बारिश होना, हिमनद(ग्लेशियर) का पिघलना, नदियों में तूफान आना, इन सबके द्वारा बाढ़ आ सकता हैं।  अप्राकृतिक कारण जैसे ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण से भी बाढ़ के आने का संभावना ज्यादा हैं। हम इस बाढ़ को रोख क्यों नहीं सकते ? २०१८ को केरल में जो बाढ़ आया था, वह कितना विनाश करक था।  बाढ़  आने का कोई प्रत्येक समय नहीं होता और ना ही कोई स्थान।  वह कही पर भी आ सकता हैं।   बाढ़ के कारण एक ही जगह पर कई दिनों  तक पानी भरा होता हैं।  अचानक आने पर बाढ़ को  कोई रोक भी नहीं सकता।  यह ही केरल में हुई। जान हानि, धन हानि, जैसे प्रश्न बाढ़ द्वारा हो सकता हैं।  मनुष्य को अब बदलना होगा। इंसान अगर काम मतलबी हुए और प्रकृति का ख्याल रखे थो धरती को बाढ़ जैसे विपदा से बचा सकते हैं।  जब मनुष्य धरती का ख्याल रखे और स्वाच रखे तब ही बहुत ऐसी विपदाओं का अंत होगा।  तो  एक साथ, एक कदम धरती के लिए रखते हैं।  जय धरती, जय माता।
Susan Paul

Susan Paul

Class X B student of Stella Maris Convent Senior Secondary School, Thiruvaniyoor.

Share this post

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on email
Share on print

Popular Stories

Think before you leap

Think before you leap…

Knowing the amazement in students face teacher called that boy to her and appreciated him, “well done” teacher said. No one understood why she is doing this to him only with an innocent face a student asked, “Teacher is this the waste?”

Read More »
Royal servant

Royal servant

‘So you are a beggar!’ roared the king, striding down to where the man stood. ‘Yet you have the temerity to call me a servant.’

Read More »

Popular Articles

bharat

भारत

भारत एक बहुत सुन्दर और पारम्परिक देश हैं। भारत को इण्डिया तथा हिन्दुस्थान के नामों से भी जाना जथा हैं।

Read More »